#TheKashmirFiles
#द_कश्मीर_फाइल्स : एक ऐसा चलचित्र जिसने हिन्दुस्थान के सभी सनातनियों को झकझोर कर रख दिया है। कारण इससे पूर्व इस सत्य से कोई अवगत ही नहीं था। लेकिन जैसे ही इस चलचित्र को लोगों ने देखा, देश-विदेश के सोशल मीडिया में एक चर्चा प्रारम्भ हो गई है कि इस सत्य को पूर्व में हम क्यों नहीं जान पाए। कारण स्पष्ट है, जैसे कि चलचित्र के ही एक दृश्य में बताया गया है 'यदि आप बिकने तो तैयार हैं तो खरीददार भी उपलब्ध हैं' |
अब इस चलचित्र के बारे में लोगों के मन में जिज्ञासा उत्पन्न होनी प्रारम्भ हुई है कि क्या वास्तव में ऐसा ही हुआ होगा? यदि उत्तर 'हाँ' है तो फिर तत्कालीन सरकारें क्या कर रही थीं? क्यों इस जातिसंहार या जातिवध का प्रतिरोध नहीं किया गया?
इतना ही नहीं आज कश्मीर से पलायन किये हिन्दुओं को पहली बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनकी पीड़ा विश्व के समक्ष प्रथम बार सत्य के साथ प्रस्तुत की जा रही है। आप कल्पना कीजिये की कि ऐसे लोग जिनके साथ आपके दशकों के संबंध हों वही आपके पलायन को लक्षित कर आपके और आपके परिवार के प्राणों के दुश्मन बन जाएं, आतंकवादियों के सहयोगी बन जाएं और तत्कालीन सरकार मूकदर्शक के अतिरिक्त कोई और भूमिका का निर्वाह न कर रही हो तो आप किस लोकतंत्र में निर्वाह कर रहे हैं।
कश्मीर के हिन्दुओं के इस संकट के समय में भी देश-दुनिया को यह बताया गया कि कश्मीरी पंडितों का पलायन हो रहा है जो एक सोची-समझी योजना के अंतर्गत किया गया, किसी को यह नहीं बताया गया कि हिन्दुओं का पलायन हो रहा है। क्योंकि हिन्दुओं को यदि जाति के अनुसार विभाजित किया जाए तो जातिगत पलायनकर्ताओं की गिनती कम हो जाती है। इससे यह शिक्षा भी मिलती है और हम सबको भी लेनी चाहिए की सनातनी केवल सनातनी है, किसी जातिवाद में यदि विभाजित होता है तो विधर्मियों को आपके अस्तित्व को समाप्त करने का आसान अवसर आप उपलब्ध कराते हैं।
इस दुर्घटना के समय मेरी पीढ़ी के लोग जो आज पांचवें दशक में हैं या प्रवेश कर रहे हैं अपनी तरुणावस्था में थे और समाचार पत्रों में घटनाक्रम पढ़कर इस घटना की गंभीरता को नहीं समझ पाए आज जब स्वयं परिवार - पत्नी और बच्चों - वाले हो गए हैं तो गंभीरता को समझ पा रहे हैं और अपने आसुओं को रोक नहीं पा रहे। क्या हम अगली पीढ़ी को भी इसी प्रकार आंसू बहाने के लिए छोड़ दें या मुखरित होकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने हेतु गंभीर हों। निर्णय आपका?
आज हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि एक समर्थ, सक्षम, आत्मनिर्भर, विश्व में सम्मानित हिन्दुस्थान के नागरिक हैं जो न केवल राष्ट्रवाद की भावना को पुनर्जीवित कर रहा है अपितु विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है।
हम सबके समक्ष यक्ष प्रश्न यह है कि क्या वर्तमान परिदृश्य में भी हम सनातन धर्म की 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और राष्ट्रवाद की भावनाओं को आत्मसात करेंगे या जाति, समुदाय या संप्रदाय में विभाजित रहकर अपने अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न उत्पन्न होने देंगे।
इस चलचित्र के माध्यम से एक अवसर आपके समक्ष प्रस्तुत हुआ है कि अभी भी समय है कि हम सब हिन्दुस्थान के नागरिक अपने घर-परिवार-मोहल्ले-समाज और प्रदेश को जागृत करें, एकत्र करें, राष्ट्रवाद को प्रबल करें और नए हिन्दुस्थान के निर्माण में अपना योगदान देते हुए आने वाले पीढ़ी को सशक्त बनाएं।
#जय_हिन्द_जय_हिन्दुस्थान
जय हिन्द, जय भारत ॥
ReplyDeleteभारत माता की जय ॥
Jai Hind....must watch...... everyone requested in theaters....long live India
ReplyDeleteJai Hind
ReplyDeleteJai Hind. Bharat Mata ki Jai
ReplyDeleteWe need more people like Mr. Agnihotri the director of the movie, in Bollywood who has the courage to tell the truth to the nation.
ReplyDeleteअगर आज भी समझ ना पाए और मंथन नहीं किया तो वह दिन दूर नहीं जब, सनातनी जातिवाद में पड़कर खत्म हो जाएगा और वह अपने लक्ष्य में सफल होंगे क्योंकि उनका तो एक ही उद्देश्य है फूट डालो राज करो और हमारी कमजोरी कि जब तक अपने घर में आग नहीं लगेगी तब तक यही सोचकर चुप रहेंगे कि दूसरे के घर में आग लगी है तो वह खुद ही देख लेगा ,हमें क्या? आज वह अपने घर की आग बुझा लेगा तो हमारे घर तक तो आग पहुंचेगी ही नहीं लेकिन हम यह भूल गए कि जिस पड़ोसी के घर में आज आग लगी है और हम एकजुट होकर नहीं खड़े हुए और उसके घर की आग ना बुझाई तो कल इस चपेट में हम सब होंगे ।*जागो* अगर आज भी ना जागे तो कभी नहीं जाग पाएंगे ।
ReplyDeleteएकजुटता में बल है हम सभी को साथ मिलकर चलना है। उनके उद्देश्यों को चूर चूर करना है और वे तभी संभव है जब हम दिल से एक होंगे।
जय हिंद ,जय भारत ,वंदे मातरम
Amazing film
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