उद्धव की मृग मरीचिका का अंत
महाराष्ट्र की सत्ता में सर्वोपरि स्थान पर स्थापित उद्धव की सत्ता की सही अर्थों में मृग मरीचिका का अंत सर्वजन को अतिप्रिय लग रहा है कारण कि वे हिन्दुस्थान के हिन्दू ह्रदय सम्राट बाला साहब ठाकरे जी के सिद्धांतों को तिलांजलि देकर आज तक इस पद पर कायम रहे।
जय भवानी जय शिवाजी के नारे के साथ महाराष्ट्र की सत्ता में अपना वर्चस्व स्थापित करने वाली शिवसेना के जितने कमजोर सेनापति उद्धव ठाकरे साबित हुए शायद इतिहास में कोई ऐसा अन्य उदाहरण नहीं है। सत्ता की भूख ने शिवसेना के लक्ष्य को जिस प्रकार प्रभावित किया और उद्धव उसके शिकार हुए वह आज स्वयं एक शर्मनाक उदाहरण स्थापित हो गया है।
एकनाथ शिंदे जैसे सर्वगुणसम्पन्न शिवसैनिक को अपनी पार्टी से विमुख कर सत्ता हस्तांतरण का ऐसा उदाहरण इतिहास में पुनः प्राप्त नहीं होगा। यह केवलमात्र सत्ता हस्तांतरण का उदाहरण नहीं अपितु अपने सिद्धांतों और मर्यादाओं के साथ समझौता करने का दंड भुगतने का सर्वोत्तम उदाहरण बनकर समाज के सम्मुख प्रस्तुत होगा।
अब सम्पूर्ण सनातनी समाज के सम्मुख यक्ष प्रश्न बनकर यह बात समक्ष आती है कि क्या अपने व्यक्तिगत लाभ की प्राप्ति हेतु हिन्दू हृदय सम्राट बालाजी ठाकरे जैसे व्यक्तित्व का परिवार सर्वस्व समर्पण हेतु आह्लादित होगा? या जिस प्रकार सोशल मीडिया में बार बार भाजपा पर शिवसेना द्वारा मुख्यमंत्री के पुत्र को दोषारोपण कर उलझाने का तथाकथित प्रयास किया गया था,यह सब उसकी परिणति है।
खैर... सत्य जो भी हो..... वर्तमान परिस्तिथियों में शिवसेना और उनके सर्वमान्य नेता उद्धव जी को सम्पूर्ण राष्ट्र धृतराष्ट्र की भूमिका में देख रहा है।
अब उद्धव ठाकरे साहेब के पास केवलमात्र एक ही प्रयास उपलब्ध है और वह है कि जब भाजपा अपना बहुमत साबित करने का प्रयास विधानसभा में करती है तो उनका सिद्धातों के आधार पर समर्थन करें और हिन्दू राष्ट्र की नींव को परिपक्व करें।
जय भवानी जय शिवाजी।
जय हिन्द जय भारत।
बहुत देर कर दी फडणवीस जी आते आते 😊
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